मौत के मुहाने पर खड़े शहर के दो बड़े प्रतिष्ठान: क्या बिकाऊ है प्रशासन का ज़मीर?
‘भव्या’ पैलेस और ‘ओझा’ डायग्नोस्टिक्स: मौत के मुहाने पर खड़े ये दो प्रतिष्ठान! प्रशासन की मिलीभगत और लालच: क्या किसी बड़ी त्रासदी का इंतज़ार कर रहा है शहर?
अजीत मिश्रा (खोजी)
क्या किसी बड़ी अनहोनी का इंतज़ार कर रहा है प्रशासन?
- नियमों की धज्जियां: बेसमेंट में चल रहा ‘मौत का खेल’, और खामोश है प्रशासन!
- धनबल के आगे नतमस्तक अधिकारी: क्या ‘100 करोड़ के क्लब’ वालों के लिए कानून अलग है?
- आग लगी तो कोई नहीं बचेगा: बीडीए और सीएमओ की लापरवाही पर उठे सवाल!
- पैसे के लिए इंसानियत की बलि: बस्ती वासियों के सुरक्षा मानकों पर बड़ा प्रहार!
बस्ती। शहर की सुरक्षा व्यवस्था पर एक बड़ा सवालिया निशान खड़ा हो गया है। मालवीय रोड स्थित ‘भव्या होटल पैलेस’ और कैली रोड स्थित ‘ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर’ जैसे व्यावसायिक प्रतिष्ठान, जो शहर के व्यस्त इलाकों में स्थित हैं, सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ा रहे हैं। यहाँ के हालात यह बयां कर रहे हैं कि अगर कभी इन जगहों पर आग जैसी कोई अप्रिय घटना हुई, तो वहां मौजूद लोगों का बचना नामुमकिन होगा।शहर के दो बड़े प्रतिष्ठान—मालवीय रोड स्थित ‘भव्या होटल पैलेस’ और कैली रोड स्थित ‘ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर’—इस समय चर्चा के केंद्र में हैं, लेकिन किसी सेवा के कारण नहीं, बल्कि अपनी सुरक्षा खामियों के कारण। यहाँ की स्थिति इतनी भयावह है कि किसी भी दिन यहाँ कोई बड़ा हादसा हो सकता है और अगर ऐसी स्थिति में आग लगी, तो यहाँ मौजूद लोगों का बचना नामुमकिन है।
नियमों को ताक पर रखकर मौत का खेल
- भव्या होटल पैलेस: यहाँ के बेसमेंट को पार्किंग के नक्शे पर स्वीकृत किया गया था, लेकिन लालच में आकर इसे पार्टी हॉल में तब्दील कर दिया गया है। इतना ही नहीं, फायर सुरक्षा के लिए छोड़ी गई जगह को भी पूरी तरह पैक कर दिया गया है।
- ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर: इस केंद्र का संचालन भी बेसमेंट में नियमों के विरुद्ध हो रहा है। यहाँ की भीड़भाड़ का आलम यह है कि लोगों का दम घुटने लगता है, फिर भी प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की मिलीभगत से यह सेंटर बेधड़क चल रहा है।
भव्या होटल पैलेस: कागजों पर पार्किंग, हकीकत में ‘मौत का जाल’
भव्या होटल पैलेस ने नियमों को ताक पर रखने की सारी हदें पार कर दी हैं।
- होटल का बेसमेंट नक्शे में पार्किंग के लिए स्वीकृत था, लेकिन लालच में आकर इसे एक बड़े ‘पार्टी हॉल’ में बदल दिया गया है।
- होटल प्रबंधन ने अग्निशमन (fire safety) के लिए छोड़ी गई खाली जगह को भी पैक कर दिया है, जिससे आपातकालीन स्थिति में बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा है।
ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर: सीएमओ की मेहरबानी और लोगों की दमघोंटू सांसें
ओझा डायग्नोस्टिक सेंटर का हाल भी भव्या होटल से कम नहीं है।
- यह सेंटर भी बेसमेंट में संचालित हो रहा है, जिसे सीएमओ (CMO) कार्यालय की कथित मेहरबानी प्राप्त है।
- यहाँ मरीजों और तीमारदारों की इतनी अधिक भीड़ होती है कि सांस लेने में भी दिक्कत होती है, और किसी भी आगजनी की स्थिति में एक भी व्यक्ति का सुरक्षित बाहर निकलना असंभव है।
प्रशासन और विभागों की चुप्पी या मिलीभगत?
इन प्रतिष्ठानों के खिलाफ उमेश गोस्वामी द्वारा कई बार जिलाधिकारी से शिकायत की गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा। आरोप है कि बीडीए (BDA) के अधिकारी कथित तौर पर पैसे लेकर फर्जी रिपोर्ट लगा रहे हैं, और सीएमओ (CMO) कार्यालय भी इसी तरह की चुप्पी साधे हुए है। यह स्थिति बेहद चिंताजनक है कि धनबल के आगे प्रशासन नतमस्तक है और आम आदमी की जान दांव पर लगी है।इन प्रतिष्ठानों के खिलाफ उमेश गोस्वामी द्वारा जिलाधिकारी से कई बार शिकायतें की गई हैं, लेकिन हर बार नतीजा शून्य रहा है।
- आरोप है कि बीडीए (BDA) के अधिकारी कथित तौर पर धन लेकर इन प्रतिष्ठानों को फर्जी रिपोर्ट के आधार पर अभयदान दे रहे हैं।
- प्रशासन की यह निष्क्रियता यह सवाल खड़ा करती है कि क्या ये अधिकारी किसी बड़ी घटना का इंतज़ार कर रहे हैं?
- जब कोई बड़ी त्रासदी होती है, तो उसके बाद केवल जेल जाने का सिलसिला शुरू होता है, लेकिन तब तक निर्दोष लोगों की जान जा चुकी होती है।
धनबल बनाम जनसुरक्षा
लेख में स्पष्ट कहा गया है कि इन प्रतिष्ठानों के संचालक जिले के ‘100 करोड़ के क्लब’ में गिने जाते हैं। जनता के पैसों से मालामाल होने वाले ये व्यापारी आज उसी जनता की सुरक्षा को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर रहे हैं। सवाल यह है कि यदि नियमों का पालन करने की क्षमता या नीयत नहीं है, तो इन्हें शहर के बीचों-बीच कारोबार करने का अधिकार किसने दिया है?
प्रशासन को अब अपनी आंखें खोलनी होंगी। यदि बीडीए और सीएमओ कार्यालय ने अपनी कार्यप्रणाली नहीं बदली, तो आने वाले समय में वे भी सीधे तौर पर होने वाली जनहानि के जिम्मेदार होंगे।
समय रहते नहीं जागे तो होगी बड़ी चूक
जब कोई बड़ी घटना होती है, तब प्रशासन को जागने की फुर्सत मिलती है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़ी त्रासदी का इंतज़ार कर रहा है? जो कारोबारी जनता के पैसों से मालामाल हुए, आज वे ही जनता की सुरक्षा को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर रहे हैं।
अगर समय रहते इन अवैध निर्माणों और मानकों की अनदेखी करने वालों पर सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो कल जब किसी की जान जाएगी, तो केवल पछतावा ही हाथ लगेगा।












